पयर्टन

प्रमुख पर्यटन स्थल

गरियाबंद जिले में पर्यटन की असीम संभावनाएं है। विभिन्न प्राकृतिक एवं रमणीय स्थलों के साथ-साथ पुरातात्विक धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल भी आकर्षण का केन्द्र हैं। प्रसिद्ध धार्मिक नगरी राजिम त्रिवेणी संगम और कुलेश्वर तथा राजीव लोचन मंदिर के नाम से ख्याति प्राप्त है। प्रकृति के गोद में बसे जतमई माता मंदिर और घटारानी पर्यटन की दृष्टि से जिले का प्रमुख केन्द्र है। इसके अलावा भूतेश्वर नाथ, रमईपाट, पंचकोसी धाम के अंतर्गत आने वाले स्थान कचना धुरवा और छोटे-छोटे प्राकृतिक झरना भी जिले में विद्यमान है।

प्रमुख स्थल - जतमई, घटारानी, भाठीगढ़, भूतेश्वरनाथ, कांदाडोंगर, टेंगनाही डोंगर, रमईपाट, सोहलीपाट, गरजई माता , राजीव लोचन मंदिर, कुलेश्वर नाथ, कचना धुरवा ।

राजिम मंदिर.

राजिम मंदिर -गरियाबंद के उत्तर-पूर्व में महानदी के दाहिने किनारे पर स्थित है, जहाँ इसकी पैरी ओर सोंढ़ूर नामक सहायक नदियाँ इससे मिलती है। यह जिला मुख्यालयों से सड़क द्वारा जुड़ा हुआ है और सड़क पर नियमित बसे चलती है। यह जिला मुख्यालय रायपुर से दक्षिण-पूर्व में 45 किलोमीटर दूर है। एक रेललाईन रायपुर-धमतरी छोटी लाईन अभनपुर से निकलती है और महानदी के बाये किनारे पर राजिम के ठीक दूसरी ओर स्थित नवापारा को जोड़ती है। राजिम के पास नदी पर एक ऊँचा पुल बन जाने से बारहमासी सड़क सम्पर्क स्थापित हो गया है।

सुविधाएं - राजिम छत्तीसगढ़ में महानदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ है। इसे छत्तीसगढ़ का "प्रयाग" भी कहते हैं। यहाँ के प्रसिद्ध राजीव लोचन मंदिर में भगवान विष्णु प्रतिष्ठित हैं। प्रतिवर्ष यहाँ पर माघ पूर्णिमा से लेकर महाशिवरात्रि तक एक विशाल मेला लगता है। यहाँ पर महानदी, पैरी नदी तथा सोंढुर नदी का संगम होने के कारण यह स्थान छत्तीसगढ़ का त्रिवेणी संगम कहलाता है। संगम के मध्य में कुलेश्वर महादेव का विशाल मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि वनवास काल में श्री राम ने इस स्थान पर अपने कुलदेवता महादेव जी की पूजा की थी। इस स्थान का प्राचीन नाम कमलक्षेत्र है। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के आरम्भ में भगवान विष्णु के नाभि से निकला कमल यहीं पर स्थित था और ब्रह्मा जी ने यहीं से सृष्टि की रचना की थी। इसीलिये इसका नाम कमलक्षेत्र पड़ा। राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग मानते हैं, यहाँ पैरी नदी, सोंढुर नदी और महानदी का संगम है। संगम में अस्थि विसर्जन तथा संगम किनारे पिंडदान, श्राद्ध एवं तर्पण किया जाता है।

जतमई मंदिर.

जतमई मंदिर - गरियाबंद में रायपुर से 85 किमी की दूरी पर स्थित है। एक छोटा सा जंगल के खूबसूरत स्थलों के बीच सेट, जतमई मंदिर माता जतमई के लिए समर्पित है। मंदिर खूबसूरती से कई छोटे शिखर या टावरों और एक एकल विशाल टॉवर के साथ ग्रेनाइट के बाहर खुदी हुई है। मुख्य प्रवेश द्वार के शीर्ष पर, एक पौराणिक पात्रों का चित्रण भित्ति चित्र देख सकते हैं। जतमई की पत्थर की मूर्ति गर्भगृह के अंदर रखा गया है।

घटारानी झरना.

घटारानी झरना - जतमई मंदिर से 25 किलोमीटर दूर स्थित एक बड़ा झरना हैं। जतमई मंदिर में ज्यादा उत्साह और भक्ति के साथ नवरात्रि पर्व मनाया जाता है, यहाँ नवरात्रि की तरह विशेष उत्सव के मौकों पर एक सजावट देखतें बनता है। मानसून के बाद यह यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय है। मंदिर के निकट सुंदर झरना बहती है, जो इस जगह को और अधिक आकर्षक बना देता है झरना इस गंतव्य को पूरे परिवार के लिए एक पसंदीदा पिकनिक स्पॉट बनाने पूर्ण प्रवाह में है। झरना मंदिर में प्रवेश करने से पहले एक डुबकी लेने के लिए सबसे अच्छी जगह है कि एक प्राकृतिक पूल में डालता है। अधिक साहसी जंगल में एक वृद्धि ले सकते हैं। आसानी से सुलभ, वाहनों रायपुर से जतमई मंदिर के लिए उपलब्ध हैं।

भूतेश्वरनाथ.

भूतेश्वरनाथ - गरियाबंद से 3 किलो मीटर दूर घने जंगलों के बीच बसा है ग्राम मरौदा। सुरम्य वनों एवं पहाडियों से घिरे अंचल में प्रकृति प्रदत्त विश्व का सबसे विशाल शिवलिंग विराजमान है। एक ओर जहां महाकाल और अन्य शिवलिंग के आकार के छोटे होते जाने की खबर आती है वहीं एक शिवलिंग ऐसा भी है जिसका आकार घटता नहीं बल्कि हर साल और बढ़ जाता है। यह शिवलिंग प्राकृतिक रूप से निर्मित है। हर साल महाशिवरात्रि और सावन सोमवार को लंबी पैदल यात्रा करके कांवरिए यहां पहुंचते हैं। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित इस शिवलिंग को यहां भूतेश्वरनाथ के नाम से पुकारा जाता है। जिसे भकुर्रा भी कहा जाता है द्वादश ज्योतिर्लिंगों की भांति छत्तीसगढ़ में इसे अर्धनारीश्वर शिवलिंग होने की मान्यता प्राप्त है।सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इस शिवलिंग का आकार लगातार हर साल बढ़ रहा है।

संभवतरू इसीलिए यहां पर हर साल आने पैदल आने वाले भक्तों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। छत्तीसगढ़ी भाषा में हुकारने की आवाज को भकुर्रा कहते हैं, इसी से छत्तीसगढ़ी में इनका नाम भकुर्रा पड़ा है।

सिकासार जलाशय.

सिकासार जलाशय - सिकासार जलाशय जिला मुख्यालय से 50 किमी की दुरी पर स्थित है यहाँ पर सभी मौसम मे पहुच योग्य है । सिकासार जलाशय का निर्माण सन 1977 मे पुर्ण हुआ । सिकासार बाँध की लबाई 1540 मी. एवं बाँध मी अधिकतम उंचाई 9.32 मी. है । सिकासार जलाशय मे 2X3.5 M.W. क्षमता का जल विद्युत संयंत्र स्थापित है जिससे सिचाई के साथ साथ विद्युत उत्पादन किया जाता है।

उदन्ती-सीतानदी टायगर रिजर्व.

उदन्ती-सीतानदी टायगर रिजर्व - उदन्ती सीतानदी टायगर रिजर्व, की अधिसूचना छत्तीसगढ़ शासन के क्रमांक/एफ-8-43 /2007/10-2 रायपुर दिनांक-20/02/2009 को की गई । उदन्ती सीतानदी टायगर रिजर्व में शुद्व नस्ल के भैसों हेतु प्रयासरत है । वर्तमान में 01 मादा वनभैस एवं मादा बच्चा और 09 नर वनभैसा है, इनके संख्या को बढ़ाने हेतु जुगाड़ में लगभग 25.00 हे0 क्षेत्र में रेस्क्यू सेंटर बनाया गया है, जहाँ मादा वनभैसा के प्रजनन से इनकी संख्या में वृद्धि की जा सके परन्तु अब नर वनभैस वृद्धि हो गई है और इनके वंश को चलाने हेतु मादा वनभैस की अत्यंत आवश्यकता है। अतएव करनाल, हरियाणा स्थित संस्थान में क्नोनल मादा वनभैस तैयार किया जा रहा है, जिसके तैयार होते ही उसे उदन्ती सीतानदी टायगर रिजर्व में लाई जायेगी जिससे कि वंश वृद्धि होगी ।